बाजपुर में पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के काफिले पर हुए हमले के मुद्दे पर विपक्ष ने सदन में खूब हंगामा काटा। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।

कानून व्यवस्था पर लाए कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग करते हुए विपक्ष ने सरकार पर कई आरोप लगाए और वेल में आकर जोरदार नारेबाजी की। सरकार ने विपक्ष के सभी आरोपों की सिरे से खारिज किया और आपराधिक मामलों में कमी आने का दावा किया।

भोजनावकाश के बाद शुरू हुई सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने राज्य में कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने चार दिसंबर को बाजपुर में पूर्व विधासभा अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य और उनके पुत्र पूर्व विधायक के काफिले पर हुए हमले का मुद्दा उठाया।ऐसे अपराधी की ओर से क्रास मुकदमा दर्ज कराया जाना, यह बताता है कि उसे राजनीति संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि राज्य में डकैती, लूट, वाहन लूट, चोरी और बलात्कार की घटनाएं भी बढ़ी हैं। जो बताती है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है।

विधायक गोविंद कुंजवाल ने कहा कि ऐसी घटनाएं लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने इस घटना में सरकार के शामिल होने का आरोप लगाया। वहीं, विधायक करण महरा ने इस हमले से एक दिन पहले पूर्व विधायक संजीव आर्य ने संबंधित व्यक्ति की ओर से कोई गड़बड़ किए जाने की शिकायत प्रशासन से की थी। उन्होंने बताया कि हमले के मुख्य आरोपी के खिलाफ 26 नवंबर को संबंधित थानाध्यक्ष की ओर जिलाधिकारी को पत्र लिखकर गुंडा एक्ट लगाने की अनुमति मांगी थी।

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