स्वरा भास्कर इन दिनों रियलिटी शो ‘पति पत्नी और पंगा’ में अपने बेबाक अंदाज से दर्शकों का दिल जीत रही हैं। शो में वह अपने रिश्तों और जिंदगी के जुड़े कुछ पहलुओं को भी सामने ला रही हैं। ऐसे में रक्षाबंधन के मौके पर अपने भाई ईशान के साथ प्यारा रिश्ता याद आना लाजमी था। डिजिटल से खास बातचीत में स्वरा भास्कर ने भाई के साथ अपने प्यारे रिश्ते, रक्षाबंधन से जुड़ी पुरानी यादों को साझा किया है।
राखी के दिन का कोई ऐसा किस्सा जिसे सोचकर आज भी आप हंसी रोक नहीं पातीं?
मैं और मेरा भाई ईशान तब शायद 13-14 साल के रहे होंगे। रक्षाबंधन का दिन था, मैंने प्यार से उसे राखी बांधी और बदले में उसने बहुत प्राउड से मेरी तरफ वही बीस रुपए बढ़ा दिए। वह पैसे उसने कुछ दिन पहले मुझसे उधार लिए थे। उस वक्त मैं कुछ पल के लिए ठिठकी…थोड़ा गुस्सा, थोड़ा हंसने जैसा मन हुआ। लगा ये कैसा तोहफा है? लेकिन अब जब उस पल को याद करती हूं, तो चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। वो 20 रुपए तब भले ही मामूली लगे हों, लेकिन अब लगता है उसमें भाई की मासूम समझ और एक छोटा-सा अहसास भी छिपा था, जिम्मेदारी निभाने का। बचपन के त्योहार ऐसे ही होते हैं…सादे, प्यारे और हमेशा याद रहने वाले।
भाई-बहन के रिश्ते में मस्ती ज्यादा होती है या तकरार? क्या आज भी बचपन वाली वह मासूम दोस्ती जिंदा है?
दरअसल, ईशान सिर्फ मेरा छोटा भाई नहीं है, बल्कि अब वह मेरा मैनेजर भी है। एक तरह से वह मेरा बॉस भी बन गया है, वही मेरे सारे कॉन्ट्रैक्ट, प्रोफेशनल काम और मीटिंग्स संभालता है। हम दोनों के बीच का रिश्ता बहुत गहरा है। जितनी गहरी हमारी दोस्ती है, उतनी ही तेज हमारी बहसें भी होती हैं। कभी किसी काम को लेकर टकरार होती है, तो कभी बिना किसी वजह के एक-दूसरे की टांग खींच लेते हैं। दुनिया में अगर कोई मुझसे सबसे ज्यादा परेशान है, तो वो मेरा भाई ही है। लेकिन वही मेरी सबसे ज्यादा फिक्र भी करता है। हमारे बीच का बचपना आज भी वैसा ही है, जैसा बरसों पहले था और यही हमारे रिश्ते की सबसे खास बात है।
कभी राखी भेजने को लेकर कोई दिलचस्प या अजीब अनुभव हुआ?
हां, हुआ है और बहुत मजेदार था। पिछले साल मैंने ईशान को इंडोनेशिया में राखी भेजी थी, जहां वह अब रहता है। डिब्बे में राखी के साथ मौली, चावल और मिठाई भी थी। जब वह पैकेज इंडोनेशिया के कस्टम ऑफिस पहुंचा, तो उन्हें समझ नहीं आया कि ये सब क्या है? उन्होंने पैकेट खोलकर पूछा कि क्या हम चावल के बीज भेज रहे हैं? राखी का कॉन्सेप्ट ही उन्हें नहीं समझ आया। नतीजा ये हुआ कि ईशान को कस्टम में चार घंटे लग गए। वह मुझसे बार-बार कह रहा था कि अब से राखी मत भेजा करो, ये तो सजा है। इस बार जब वह दिल्ली आया था, तो मैंने राखी पहले से पैक करके दे दी थी और कहा था कि राखी वाले दिन ही खोलना। लेकिन वह इतना लालची निकला कि इंडोनेशिया पहुंचते ही राखी के साथ दी गई मिठाई खा गया।
