नई दिल्ली: देशभर के लाखों रेलयात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। अब टिकट बुकिंग में न तो देरी होगी और न ही कंफर्म सीट के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ेगा। रेलवे जल्द ही अपने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) को अपग्रेड करने जा रहा है। इससे टिकट बुकिंग की रफ्तार चार गुना तक बढ़ जाएगी। अभी प्रति मिनट कम टिकट बुक होते हैं, वहीं नया सिस्टम प्रति मिनट की अधिक टिकट बुक करने की क्षमता पहले की मुकाबले ज्यादा हो जाएगी। अपग्रेड के बाद यह सिस्टम प्रति मिनट एक लाख टिकट बुक करने में सक्षम होगा। फिलहाल यह क्षमता 25,000 टिकट प्रति मिनट है। रेलवे की इस महत्वपूर्ण पहल का सबसे बड़ा फायदा त्योहारों, छुट्टियों और भीड़भाड़ वाले सीजन में मिलेगा, जब टिकट मिलना मुश्किल हो जाता था।
रेल मंत्री ने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा कि, सेंट्रल फॉर रेलवे इनफार्मेशन सिस्टम्स (क्रिस) के माध्यम से पीआरएस का पूरा पुनर्गठन किया जा रहा है। इसमें हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, नेटवर्क उपकरण और सिक्योरिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर को बदला और अपग्रेड किया जाएगा। नई प्रणाली नवीनतम क्लाउड टेक्नोलॉजी पर आधारित होगी, जिससे यात्रियों को बेहतर और तेज सेवाएं मिल सकेंगी। वर्तमान पीआरएस सिस्टम 2010 में लागू किया था और यह इटेनियम सर्वर और ओपन वीएमएस (वर्चुअल मेमोरी सिस्टम) पर चलता है। इस कारण मौजूदा पीआरएस सिस्टम को पारंपरिक टेक्नोलॉजी सिस्टम से लेटेस्ट क्लाउड टेक्नोलॉजी सिस्टम में अपग्रेड करने की आवश्यकता है।
रेलमंत्री ने यह भी बताया कि, भारतीय रेलवे ने हाल ही में रेल वन ऐप भी लॉन्च किया है, जिससे यात्री अपने मोबाइल से रिजर्वड और अनरिजर्वड दोनों तरह की टिकट बुक कर सकते हैं। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने 1 नवंबर, 2024 से रिजर्व टिकटों के एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (एआरपी) को घटाकर 60 दिन कर दिया है, जो पहले 120 दिन था। मंत्री के अनुसार, यह बदलाव बुकिंग ट्रेंड और रद्दीकरण की घटनाओं को कम करने के लिए किया गया है।
रेलवे ने सामान्य श्रेणी के यात्रियों की सुविधा के लिए बड़े पैमाने पर कदम उठाए हैं। गैर-एसी डिब्बों का प्रतिशत अब लगभग 70% हो गया है और अगले पांच साल में 17,000 नए गैर-एसी सामान्य और शयनयान डिब्बों के निर्माण के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में ही लंबी दूरी की ट्रेनों में 1,250 सामान्य डिब्बे जोड़े गए हैं। यह अपग्रेडेशन न केवल बुकिंग की क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि यात्रियों के अनुभव को भी आधुनिक और सुगम बनाएगा। रेलवे का दावा है कि यह बदलाव भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।
