कर्नाटक से शुरू हुआ हिजाब मुद्दा अब पूरे देश में फैल गया है. देश भर में विवादित बयानों की झड़ी लग गई है. सियासी और धार्मिक नेताओं के दखल के चलते हिजाब पर हंगामा बढ़ता जा रहा है.  पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद का एक मामला सामने आया है जहां हेडमास्टर ने स्कूल में मुस्लिम बच्चियों को हिजाब और बुरका पहन कर आने से रोका.

इस वक्त जब पूरे देश को करोना के कारण खराब हुई आर्थिक स्थिति बेरोजगारी, गरीबी जैसी तमाम समस्याओं से निपटने पर बात करनी चाहिए. उस वक्त देश के अलग अलग राज्यों से हिजाब के समर्थन और विरोध में प्रदर्शन किए जा रहे हैं.

इसी बीच कई राज्यों से हिजाब प्रदर्शन में हंगामा और तोड़फोड़ की घटना सामने आई है. हंगामे की आग में नेताओं के विवादित बयान घी की तरह काम कर रहे हैं. नेताओं के बयानों से आम जनता की भावनाएं भड़काई जा रही हैं.

11 फरवरी को मालेगांव में हिजाब डे मनाया गया. मुस्लिम धर्मगुरू भी हिजाब के समर्थन में डटे नजर आ रहे थे. इस बीच बीजेपी की तरफ से हिजाब के मुद्दे को उठाकर समान नागरिक संहिता की चर्चा तेज हो गई है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने समान नागरिक संहिता की बात की जिसका समर्थन फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह ने किया. लेकिन सवाल जस का तस है.

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