पांच बार से मऊ के विधायक मुख़्तार अंसारी का टिकट मायावती ने काटा तो ओवैसी ने टिकट का ऑफर दे दिया। इससे पहले ओवैसी ने अतीक अहमद की पत्नी को मजलिस में शामिल कराया था। ओवैसी यूपी की 19 फ़ीसदी मुस्लिम वोटो को लामबंद करने के लिए हर चर्चित मुस्लिम चेहरे को दोनों हाथों से थामने के लिए आतुर हैं।

मुख़्तार से साथ मुस्लिम वोट लामबंद तो रहते लेकिन परिवार या खुद मुख़्तार की छवि सांप्रदायिक नहीं रही। 2007 के यूपी चुनाव में मुख़्तार ने भाई के साथ मिलकरलकौमी एकता दल भी बनाया। ऐसे में मुख़्तार औवैसी का दामन थामे इसकी उम्मीद बहुत कम है। मुख़्तार के सबसे बड़े भाई सुगबुतुल्ला अंसारी ने पिछले हफ़्ते ही समाजवादी पार्टी ज्वाइन की है।

मुख़्तार के वोटों का लालच औवैसी और सपा दोनों को है। एक पार्टी को माफिया लगने वाला दूसरी पार्टी को मसीहा नज़र आने लगता है और इसी राजनीतिक सरपरस्ती की वजह से मुख़्तार की हैसियत ऐसी हो गई है। फ़िलहाल 16 साल से जेल में बंद मुख़्तार का टिकट काटकर मायावती ने माफिया को फिर चर्चा में ला दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *