देश में कोयला संकट से बिजली संकट का खतरा मंडरा रहा है। इसी बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि राज्यों के पास कोल इंडिया का करीब 20 हजार करोड़ रुपये बकाया है। कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल बड़े डिफॉल्टर हैं।

देश में कोयले के संकट के बीच बिजली संकट गहराने की आशंका के बीच कोयला मंत्रालय ने ये तक कह दिया है कि वे राज्यों को जनवरी से पत्र लिखकर स्टॉक लेने के लिए कह रहा था, लेकिन राज्यों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।  कोयला मंत्रालय ने बताया है कि झारखंड, राजस्थान और पश्चिम बंगाल के पास भी कायले की खदानें हैं, लेकिन इन राज्यों ने बहुत कम मात्रा में खनन किया या नहीं किया।

देश में कोयले के संकट का एक कारण आयातित कोयले का महंगा होना है। एक रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2021 में आयातित कोयले की कीमत 4200 रुपये टन थी जो सितंबर अक्तूबर में बढ़कर 11,520 रुपये टन हो गई। इससे भी बिजली उत्पादन की व्यवस्था लड़खड़ाई है। केंद्र ने कहा है कि अगले पांच दिनों में वे कोयले का उत्पादन 1.94 लाख टन से बढ़ाकर 20 लाख टन करेगा।

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