इटावा।रविवार को चंबल आर्काइव न्यास ने चौगुर्जी स्थित संग्रहालय के तृतीय स्थापना दिवस पर विचार गोष्ठी का आयोजन किय।जिसमें वक्ताओं ने संग्रहित धरोहर पर अपने विचार प्रकट किए।वहीं ब्रिटेनिका एनसाइक्लोपीडिया का समावेश भी किया गया। इस अवसर पर संस्थापक किशन पोरवाल ने कहा कि यह चम्बल की विरासत को समेटे अपने ढंग का पहला संग्रहालय है।इस संग्रहालय का मकसद चम्बल की उस पहचान को हटाना है,जो नकारात्मक तौर पर बन चुकी है।इस संग्रहालय से चम्बल के क्रांतिकारी इतिहास से लोगों को साझा होने का मौका मिल रहा है।सामाजिक कार्यकर्ता रौली यादव ने कहा कि संग्रहालय में हजारों दुर्लभ किताबें हैं।इसमें
17 वीं शताब्दी से लेकर अब तक करीब 20 हजार पुस्तकें-पत्रिकाएं सैकड़ो दुर्लभ दस्तावेज मौजूद हैं।विभिन्न रियासतों से लेकर विदेशों तक के चालीस हजार डाक टिकट,4 हजार हाथों से लिखे पत्रों के साथ ही प्राचीन पेंटिंग-तस्वीरें,प्राचीन मानचित्रों के इलावा राजा भोज के दौर से लेकर अलग-अलग काल के करीब तीन हजार प्राचीन सिक्के,सैकड़ों ग्रामोफोन रिकार्ड, सैकड़ों दस्तावेजी फिल्में आदि सामग्री उपलब्ध है।इससे पूर्व बिहार निवासी विकास कुमार द्वारा ब्रिटेनिका एनसाइक्लोपीडिया के 31 वॉल्यूम को भेजा गया।जिसका संग्रहालय में समावेश भी किया गया।अवसर पर मुख्य रूप से सर्वोदय जागरण मंच के अध्यक्ष नीरज यादव,दी अन्नदाता के संस्थापक मोहित यादव,ग्रीश पालीवाल,साधना सिंह एवं देवाशीष आर्य मौजूद रहे।

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