उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 2017 की तरह 2022 में चुनावी नतीजे दोहराने की कवायद में जुट गई है. ऐसे में बीजेपी की नजर सपा के हार्डकोर यादव वोटबैंक पर है, जिसे अपने साथ लाने की कवायद में योगी आदित्यनाथ जुट गए हैं.

सूबे में ओबीसी समाज में सबसे बड़ी आबादी यादवों की है, जो सत्ता बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं.राम नरेश यादव से लेकर मुलायम सिंह और अखिलेश यादव तक तीन यादव पांच बार यूपी के मुख्यमंत्री बने.

2014 के बाद से यादव राजनीति को झटका भी लगा है और सत्ता के साथ-साथ राजनीति पर भी संकट खड़ा हुआ है. 2022 में अब इसी यादव वोटबैंक पर बीजेपी और सपा आमने-सामने हैं.

2022 के विधानसभा चुनाव के सियासी समीकरण दुरुस्त करने में जुटी बीजेपी की नजर यादव वोटों पर है. बीजेपी ओबीसी मोर्चा के सामाजिक प्रतिनिधि सम्मेलन के तहत शुक्रवार को यादव समाज को एकजुट किया जा रहा है.

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