सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को लुटियंस दिल्ली के सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में भूमि उपयोग में प्रस्तावित बदलाव करने वाली केंद्र सरकार की अधिसूचना को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि जब तक याचिकाकर्ता यह आरोप नहीं लगाता कि प्रस्तावित बदलाव दुर्भावना से ग्रसित है तब तक कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता क्योंकि यह नीतिगत मामला है।

पीठ ने अपने आदेश में कहा है, ‘याचिकाकर्ता ने यह तर्क नहीं दिया है कि भूमि उपयोग में परिवर्तन एक दुर्भावनापूर्ण तरीके से किया गया है। यह याचिकाकर्ता का तर्क है कि चूंकि पूर्व में यह मनोरंजन क्षेत्र था इसलिए इसे उसी तरह बनाए रखा जाना चाहिए था। यह न्यायिक समीक्षा का दायरा नहीं हो सकता है। यह संबंधित अथॉरिटी का काम है। यह सार्वजनिक नीति का मामला है।’

याचिकाकर्ता राजीव सूरी की ओर से पेश वकील शिखिल सूरी द्वारा तर्क दिया गया था कि अधिसूचना संविधान के अनुच्छेद-21 का उल्लंघन है। यह दिल्ली के निवासियों को सेंट्रल विस्टा में हरे व खुले स्थान से वंचित करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *